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आचार्य श्रीराम शर्मा >> अतीन्द्रिय क्षमताओं की पृष्ठभूमि

अतीन्द्रिय क्षमताओं की पृष्ठभूमि

श्रीराम शर्मा आचार्य

प्रकाशक : श्रीवेदमाता गायत्री ट्रस्ट शान्तिकुज प्रकाशित वर्ष : 2000
पृष्ठ :104
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 4105
आईएसबीएन :000

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गुरुदेव की वचन...

अतींद्रिय क्षमताओं की पृष्ठभूमि व आधार


अतींद्रिय ज्ञान अब एक वैज्ञानिक तथ्य है। सामान्यतः मात्र ज्ञानेंद्रियों की सहायता से ही ज्ञान संपादन किया जाता है, पर अब विश्लेषण का विषय छठी इंद्रिय भी बन गयी है। मनुष्य कई बार ऐसी जानकारियाँ प्राप्त करता है, जो इंद्रिय ज्ञान की परिधि से सर्वथा बाहर की बात होती है। अमेरिकी मनोरोग चिकित्सक ने अपनी पुस्तक "बियोंड टेलीपैथी" में ऐसी अनेक घटनाओं का उल्लेख किया है, जिनसे सिद्ध होता है कि कितने ही मनुष्यों को समय-समय पर दूरस्थ स्थानों पर घटित हुई घटनाओं का ज्ञान बिना किसी साधन-संचार के अनायास ही होते देखा गया है।

प्रामाणिक इतिहासकार 'हिरोडोटस' ने ईसा से पूर्व ५४६-५६० में हुए लीडिया के राजा क्रोशस का विवरण लिखा है। उसमें कहा गया है कि, राजा अपने शत्रुओं से आतंकित था। उसने किसी भविष्यवक्ता की सहायता से रास्ता निकालने की बात सोची। प्रामाणिक भविष्यवक्ता को ढूँढ निकालने के लिए उसने तत्कालीन सात प्रसिद्ध भविष्यवक्ताओं के पास अपने दूत भेजे और कहा, जिस समय मिलें उसी समय वह पूछे–'अब क्रोशस' क्या कर रहे हैं ? इधर राजा ने अपना घड़ी-घड़ी का कार्य विवरण लिखने की व्यवस्था कर दी।

छह के उत्तर तो गलत निकले, पर सातवें उत्फी नामक भविष्यवक्ता की बात अक्षरशः सही निकली। उसने दूत के बिना पूछे ही बताया-"क्रोशस इस समय पीतल के बर्तन में कछुए और भेड़ का मिला हुआ मांस भून रहा है।" पीछे राजा ने उस भविष्यवक्ता को बुलाया और उसके परामर्श से कठिनाइयों से त्राण पाया।

इटली के एक पादरी अलोफोन्सस लिगाडरी ने अर्धमूर्च्छित स्थिति में दिवा स्वप्न देखा कि-"ठीक उसी समय रोम के बड़े पोप का स्वर्गवास हो गया है।"

उन दिनों सन् १७७४ में यातायात या डाक-तार का भी कोई प्रबंध न था। इतनी दूर की किसी घटना की ऐसी जानकारी जब उन्होंने अपने शिष्यों को सुनाई, तो किसी को इसका कोई आधार प्रतीत नहीं हुआ। बड़े पोप बीमार भी नहीं थे। फिर अचानक ऐसी यह मृत्यु किस प्रकार हो सकती है ? कुछ ही दिन बाद समाचार मिला कि पोप की ठीक उसी समय, वैसी ही स्थिति में मृत्यु हुई थी, जैसी कि लिगाडरी ने विस्तारपूर्वक बताई थी।

सन् १७५६ की वह घटना प्रामाणिक उल्लेखों में दर्ज है, जिसके अनुसार स्वीडन के इमेनुअल स्वीडनबर्ग नामक साधक ने सैकड़ों मील दूर पर ठीक उसी समय हो रहे भयंकर अग्निकांड का सुविस्तृत विवरण अपनी मित्र मंडली को सुनाया था। उस अग्निकांड में घायल तथा मरने वालों के नाम तक उसने सुनाये थे, जो पीछे पता लगाने पर अक्षरशः सच निकले।

खोये हुए मनुष्यों एवं सामानों के संबंध में अतींद्रिय चेतनासंपन्न मनुष्य जब सही अता-पता देने में सही सिद्ध होते हैं, तो यही मानना पड़ता है कि, प्रत्यक्ष साधनों एवं इंद्रिय ज्ञान के सहारे जो कुछ जाना जाता है, बात उतने तक ही सीमित नहीं है, मनुष्य की रहस्यमयी शक्तियों के आधार पर वैसा भी बहुत कुछ जाना जा सकता है, जो सामान्यतया असंभव ही कहा जा सकता है।

विज्ञानी डॉ० मोरे बर्सटीन ने लेडी वंडर के बारे में एक दिन अपने एक मित्र से सुना, इसके पूर्व विमान-यात्रा में उनका बिस्तर व सामान खो गया था, जिसमें जरूरी कागजातों वाला बक्सा भी था। विमान कंपनी ने खोए सामान के नं मिलने की घोषणा कर दी तथा मुआवजे का प्रस्ताव रखा था, जिसे बर्सटीन ने अस्वीकार कर खोज जारी रखने को कहा था।

अब मित्र से सन बर्सटीन को अपने सामान की चिंता तो जाती रही। भीतर की जिज्ञासा-वृत्ति उमड़ उठी। वे चल पड़े लेडी वंडर से मिलने। वहाँ सर्व प्रथम बर्सटीन ने पूछा-बताइये, पेरिस में मैंने जो बिल्ली पाल रखी थी, उसका नाम क्या था ? लेडी वंडर ने उसे विस्मित करते हुए बताया-भर्तिनी। फिर बर्सटीन ने अपने सामान की बाबत पूछा। लेडी वंडर ने बताया तुम्हारा सामान न्यूयार्क हवाई अड्डे में है।

पहले तो बर्सटीन को अविश्वास हुआ, क्योंकि न्यूयार्क हवाई अड्डा छाना जा चुका था, पर फिर उसने हवाई अड्डे के अधिकारियों को फोन किया-"महोदय, मुझे विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली है कि मेरा सामान न्यूयार्क हवाई अड्डे के भवन के ही भीतर है। कृपया दुबारा तलाश करें।" तलाशी शुरू हुई और सामान सचमुच मिल गया।

न्यूजर्सी की आत्मवेत्ता महिला फ्लोरेन्स किसी वस्तु को छूकर उससे संबंधित व्यक्ति के बारे में जो कुछ बताती थी, उसका प्रायः ८० प्रतिशत सच होता रहा। गुमशुदा की तलाश, हत्याओं की जाँच तथा अन्य खोज-बीन के मामलों में पुलिस भी उसकी सहायता लेती रही।

पूर्वाभास की यह क्षमता कई व्यक्तियों में असाधारण तौर पर विकसित होती है। द्वितीय महायुद्ध में ऐसे लोगों का दोनों पक्षों ने उपयोग किया था। हिटलर के परामर्श मंडल में पाँच ऐसे ही दिव्यदर्शी भी थे। उनका नेतृत्व करते थे विलियम क्राफ्ट।

प्रत्यक्ष इंद्रिय शक्ति हमारे सामान्य जीवन निर्वाह में अतीव उपयोगी भूमिका संपन्न करती है। वह न हो तो फिर हम जीवित मांस पिंड की तरह इधर-उधर लुढ़कते ही मौत के दिन पूरे करेंगे। मानवी प्रगति में उसकी परिष्कृत ज्ञानेंद्रियों और कर्मेंद्रियों का ही प्रमुख योगदान है।


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    अनुक्रम

  1. भविष्यवाणियों से सार्थक दिशा बोध
  2. भविष्यवक्ताओं की परंपरा
  3. अतींद्रिय क्षमताओं की पृष्ठभूमि व आधार
  4. कल्पनाएँ सजीव सक्रिय
  5. श्रवण और दर्शन की दिव्य शक्तियाँ
  6. अंतर्निहित विभूतियों का आभास-प्रकाश
  7. पूर्वाभास और स्वप्न
  8. पूर्वाभास-संयोग नहीं तथ्य
  9. पूर्वाभास से मार्गदर्शन
  10. भूत और भविष्य - ज्ञात और ज्ञेय
  11. सपनों के झरोखे से
  12. पूर्वाभास और अतींद्रिय दर्शन के वैज्ञानिक आधार
  13. समय फैलता व सिकुड़ता है
  14. समय और चेतना से परे

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